शुक्रवार, 4 सितम्बर 2026 |
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पाटकर की याचिका पर इंदौर हाईकोर्ट ने चार जिलों के कलेक्टरों को आदेश : दो दशक बाद विस्थापितों को आवंटित भूखंडों की रजिस्ट्री की राह हुई आसान

Admin

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दो दशक बाद विस्थापितों को आवंटित भूखंडों की रजिस्ट्री की राह हुई आसान

धार, म.प्र.। सरदार सरोवर बांध परियोजना के डूब प्रभावितों को बसाहटों में भूखंड आवंटित किए गए हैं। वर्ष 2002 से हुई इस प्रक्रिया के बाद से विस्थापितों को अपने आवंटित भूखंडों पर रजिस्ट्री का हक नहीं मिल पा रहा था। ऐसे में विस्थापितों को नामांतरण, सीमांकन आदि कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। इस मामले को लेकर नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर ने मप्र उच्च न्यायालय इंदौर खंडपीठ में याचिका दायर की गई थी। जिस पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया हैं, जिससे विस्थापितों के भूखंडों की रजिस्ट्री राह आसान होगी।

यह आदेश न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायाधीश बिनोद कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने दिया। न.ब.आ. के राहुल यादव ने बताया कि न्यायालय के समक्ष प्रदेश मुख्य सचिव राजेश राजोरा वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से न्यायालय के समक्ष उपस्थित हुए और उन्होंने यह स्वीकार किया कि सरदार सरोवर परियोजना के विस्थापितों को जो भूखंड आवंटन पत्र दिए गए थे, वे आज तक रजिस्ट्रार कार्यालय में पंजीकृत नहीं हुए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने समूचे मध्य प्रदेश की भूमि का सीमांकन, नामांतरण और पंजीयन करने के लिए एक व्यापक योजना तैयार की है। जिसमें विस्थापितों के मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही राजोरा ने ड्रोन सर्वेक्षण पर जोर दिया। जिस पर मेधा पाटकर जी ने सवाल उठाया। इस पर न्यायालय ने कहा कि वे शासन के इस प्रस्ताव से प्रभावित नहीं हैं। क्योंकि वर्ष 2002 से हजारों विस्थापितों को पुनर्वास नीति के तहत भूखंड दिए गए थे, परंतु इन आवंटन पत्रों को भारतीय पंजीयन अधिनियम 1908 की धारा 17 के तहत अब तक पंजीकृत नहीं किया गया है। इस वजह से विस्थापितों को नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा, गिरवी, विक्रय या किसी अन्य व्यक्ति के नाम हस्तांतरण जैसे अधिकार नहीं मिल पा रहे हैं। यदि उनका आवंटन पत्र खो जाए या नष्ट हो जाए तो नया पत्र प्राप्त करना भी अत्यंत कठिन होगा। इसलिए न्यायालय ने इस कार्य को प्राथमिकता से लेने का आदेश दिया है।

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चार कलेक्टरों को दिए यह निर्देश:- बड़वानी, खरगोन, अलीराजपुर और धार जिलों के कलेक्टरों को निर्देश दिया है कि वे एक समिति गठित करें। जिसमें उप प्रभागीय अधिकारी, तहसीलदार और उप पंजीयक सदस्य होंगे। यह समिति उन सभी विस्थापितों के नाम पर भूमि का पंजीयन करेगी। जिनके पक्ष में आवंटन या विक्रय पत्र जारी हुए हैं। इसके बाद उनके नाम राजस्व अभिलेखों व नक्शों में दर्ज किए जाएंगे। पश्चात संबंधित ग्राम पंचायत या नगर पालिका अपने अभिलेखों में नाम दर्ज करेगी।

न.घा.वि.प्र.-ननिप्रा के सक्षम अधिकारी नियुक्त होंगे:- आदेश में निर्देश किया कि नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण और नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण एक सक्षम अधिकारी नियुक्त करें, जो कलेक्टर द्वारा गठित समिति के सदस्य होंगे। भूमि के पंजीयन दस्तावेज में क्षेत्रफल, नप्ती, सीमाएं और दिशाएं जैसी सभी जानकारियां शामिल की जाएगी। ताकि भविष्य में कोई राजस्व संबंधी या नागरिक विवाद उत्पन्न न हो।

विस्थापित-समिति के बीच समन्वय करें पाटकर:- वहीं न्यायालय ने मेधा पाटकर को निर्देशित किया कि वे भी विस्थापितों और समितियों के बीच समन्वय स्थापित करें। ताकि कार्य प्रभावी और समयबद्ध रूप से पूरा हो सके। वहीं न्यायालय ने संपूर्ण पंजीयन कार्य के लिए 2 माह की समय सीम तय की है। इसके बाद इनके भूखंडों के संबंधी अधिकार के अन्य मुद्दों पर जो याचिका में प्रस्तुत किए है, उन पर भी सुनवाई और निर्णय होगा।

5 जनवरी-2026 को पेश करें रिपोर्ट:- वहीं न्यायालय ने बड़वानी, खरगोन, अलीराजपुर और धार के कलेक्टरों को यह आदेश दिया है कि वे अगली सुनवाई 5 जनवरी 2026 पर इन निर्देशों के अनुपालन पर प्रतिवेदन (रिपोर्ट) प्रस्तुत करें। वहीं आदेश में यह भी कहा हैं कि उक्त कार्यों के लिए जिला मुख्यालय पर प्राथमिकता से एक विशेष शिविर आयोजित किया जाएगा। इस पूरे कार्य के अनुपालन की प्राथमिक जिम्मेदारी अतिरिक्त मुख्य सचिव की होगी।

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